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The Union Minister for Steel, Chemicals and Fertilisers, Mr Ram Vilas Paswan, enjoys Himachali food

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Saturday, January 22, 2011

ग्रामीण उद्यमों के विकास में हिमाचल अग्रणी


ग्रामीण उद्यमों के विकास में हिमाचल अग्रणी


 ग्रामीण क्षेत्रों का विकास एवं सम्पन्नता राज्य सरकार का मुख्य ध्येय है। हिमाचल प्रदेश की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी गांवों में बसती है, इसी के दृष्टिगत ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश सरकार जहां एक ओर कृषि को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर गैर कृषि क्षेत्र में भी स्वरोजगार के अवसर सृजित कर रही है।


              प्रदेश सरकार द्वारा दक्षता विकास के लिए की जा रही पहल से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्वावलम्बी बनाने के साथ-साथ उन्हें व्यक्तिगत तौर पर या समूहों में स्वरोजगार के साधन जुटाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।


             वर्ष 2009-10 में 5 गैर सरकारी संगठनों में 12 दक्षता विकास पहल (एस.डी.आई.) के माध्यम से 9.77 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई थी। चालू वित्त वर्ष में 24 एस.आई.डी. के तहत 11 गैर सरकारी संगठनों को  20.6 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई, जिनके माध्यम से मण्डी, कुल्लू, चम्बा, सोलन, हमीरपुर तथा शिमला जिलों के 600 बेरोजगार व्यक्तियों को लेडीज बैग, पारम्परिक परिधान जैसे शाॅल, लाहुली मोज़े, स्कार्फ, सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पाॅर्लर, कम्प्यूटर शिक्षा तथा अन्य व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया गया था।


              उत्पादों की विपणन व्यवस्था को बेहतर बनाने हेतु ग्रामीण हाटों की स्थापना के लिए ऋण सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। वर्ष 2009-10 में मण्डी, ऊना तथा सिरमौर जिलों में 5 ग्रामीण हाटों की स्थापना के लिए 23.74 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई थी। इन ग्रामीण हाटों का निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा इन्हें वर्ष 2011 के प्रथम तिमाही में क्रियान्वित किया जाएगा। प्रदेश के अन्य स्थानों में ग्रामीण हाटों की स्थापना हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। 


           इसके अतिरिक्त ‘रुरल मार्ट’ योजना के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में विक्रय केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं, जो कारीगरों व कृषकों के उत्पादों के विपणन में सहायक सिद्ध होंगे। वर्ष 2009-10 में विभिन्न स्वयं सहायता समूहों को 8 ‘रुरल मार्ट’ स्थापित करने हेतु  7.67 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई थी। वर्ष 2011 में 10 ‘रुरल मार्टों’ की स्थापना के लिए 6.63 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। इन मार्टों के माध्यम से दूध/दुग्ध उत्पादों, साॅफ्ट टाॅयज, अचार, जैम, जैली, सेवियां, साॅस चटनी, वड़ी, सिसल, बग्गर, खजूर इत्यादि से निर्मित हस्तशिल्प उत्पादों, हैंड बैग, मोबाइल कवर, टी-कोस्टर, टेबल मैट, हस्त निर्मित कागज़ आदि उत्पादों का विपणन सुनिश्चित बनाया जा रहा है।


          जिला सोलन के दाड़लाघाट में स्थित दक्षता एवं उद्यम विकास संस्थान (आई.एस.ई.डी.) द्वारा इस वर्ष 20 प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से 280 पात्र व्यक्तियों को 7.46 लाख रुपये व्यय करके प्रशिक्षित किया गया।


            हथकरघा बुनकरों के लिए चलाई जा रही दक्षता उन्नयन तथा रूपांकन विकास योजना (एस.यू.डी.एच.ए.)के तहत हिमबुनकर, कुल्लू के लिए 4.91 लाख रुपये की योजना स्वीकृत की गई, जिसके माध्यम से हथकरघा बुनकरों को दक्षता उन्नयन हेतु प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।            

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