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The Union Minister for Steel, Chemicals and Fertilisers, Mr Ram Vilas Paswan, enjoys Himachali food

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Monday, February 28, 2011

हिमाचल प्रदेश को ब्राडगेज लाईन से जोडऩे की बात हो रही हे......


अंखड हिमाचल ब्यूरो कांगडा
हिमाचल प्रदेश को ब्राडगेज लाईन से जोडऩे की बात हो रही हे। लेकिन जिस तरीके से रेल विस्तार पर हिमाचल में काम हो रहा है। उससे तो लेह तक रेल पÞंहुचाने की बात तो दूर लेकिन मौजूदा नेरो गेज को ही बदलना आसान नहीं है। पठानकोट से ज्वालामुखी रोड व ज्वालामुखी रोड से जोगिन्द्रनगर लाईन का आज भी वही हाल है। जो आजादी के पहले था।  कालका शिमला लाईन भले ही हेरिटेज घोषित हो चुकी हो । लेकिन इसका विस्तार एक सपना ही रहेगा।  नंगल तलवाड़ा लाईन पर तो काम मंद गति से चल रहा है। उसे देख कर लगता है कि यह काम तीन दशकों बाद पूरा होगा। इस रेल विस्तार परियोजना पर 38 साल पहले काम शुरू हुआ था। विडंबना है कि 38 सालों में 36 किलोमीटर रेल लाईन ही बन पाई। यानि हर साल में एक किलो मीटर। इस मामले पर रेल मंत्रालय व सरकार आपस में उलझे रहे व दोष एक दूसरे पर थोपते रहे। चूंकि पहले हिमाचल सरकार को जमीन देनी थी । बाद में सरकार अपनी बात पर से पीछे हट गई व कहा गया कि रेलवे सीधे ही जमीन मालिकों से जमीन ले। यही एक वजह थी जिससे सारा मामला उलझता गया। वहीं हिमाचल के हिस्से भी रेल बजट का छोटा हिस्सा आता रहा। रेलवे ने ऊना जिला के अंब तक जमीन हस्तांतरण कर लिया है। यह लाईन तलवाड़ा तक जानी है। लेकिन मुआवजे के करीब 400 केस अभी भी अदालतों में हैं। माना जा रहा है कि अगले साल तक अंब तक रेल लाईन बिछाने का काम पूरा हो जायेगा। लेकिन अंब से तलवाड़ा तक जमीन हंस्तातरण का काम बहुत ही धीमी गति से चल रहा है। यह चालीस किलोमीटर का फासला है। नंगल ऊना तलवाड़ा रेल लाईन हिमाचल की आथर््िाकी में बेहतर तरीके से सहायक सिद्घ हो सकती हैं।      सरकार उन राज्यों की पूरी तरह सहायता कर रही है, जहां आतंकवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। जबकि हिमाचल प्रदेश जैसे शांतिप्रिय राज्य, जहां के लोग कानून के अनुसार कार्य करतेे हैं, को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। केन्द्रीय रेल मंत्री केवल अपने गृह राज्यों तक सीमित रहे हैं और देश के अन्य भागों के बारे में नहीं सोचा। यदि देश में रेल विस्तार का कार्य केन्द्रीय रेल मंत्रियों के केवल अपने लाभ के लिए, लिए गए निर्णयों के अनुसार होता रहा तो देश का भविष्य क्या होगा, यह सोचने की बात है। स्वतंत्रता के उपरांत 63 वर्षों में हिमाचल प्रदेश में केवल 33 कि-मी- लंबी रेल लाईन ही बिछाई जा सकी है और उसका भी केवल कुछ हिस्सा ही विद्युतिकृत है। 1962 में जब देश को चीन के साथ युद्ध लडऩा पड़ा था तो हमारा देश न तो तैयार था और न ही उसके पास पूरा साजो-सामान था। अब जब चीन देश की सीमा के समीप सभी मौसमों के लिए उपयुक्त रेल नेटवर्क, हवाई पट्टियां और सडक़ नेटवर्क के माध्यम से अपनी यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ कर रहा है तो रेल बजट में लेह तक रेल लाईन को न्यूनतम प्राथमिकता दी गयी है। जबकि यह रेल लाईन सामरिक रूप से महत्वपूर्ण और देश हित में है।   हिमाचल भारतीय जनता पार्टी प्रदेश उपाध्यक्ष कृपाल परमार नें केन्द्रीय रेल बजट को हिमाचल के प्रति अन्यायपूर्ण, भेदभावपूर्ण तथा सौतेले व्यवहार की इनतहा बताकर रेल मंत्री ममता बेनर्जी द्वारा प्रस्तुत 2011-12 के रेलवे बजट को जनविरोधी बताया है।   कृपाल परमार ने कहा कि गत कई वर्षों से हिमाचल के प्रति यूपीए सरकार का भेदभावपूर्ण और सौतला व्यवहार जारी है। पूर्व सांसद ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सीमांत प्रदेश होने के कारण अति संवेदनशील है तथा यहां रेलवे नेटवर्क के विस्तार और नई रेलवे लाइने बिछाने की भारी आवश्यकता है, लेकिन केन्द्र सरकार तथा यूपीए सरकार के रेल मंत्री अपने प्रदेशों तक ही सीमित होकर रह गए हैं तथा उन्हें दूसरे प्रदेशों की आवश्यकताओं की कोई फिक्र ही नहीं है तथा वे विकास की योजनाओं को  ाी राजनैतिक आईने से देखते हैं।

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