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The Union Minister for Steel, Chemicals and Fertilisers, Mr Ram Vilas Paswan, enjoys Himachali food

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Monday, March 7, 2011

विश्व भर में अपने अधिकार के लिए संघर्ष के दौरान महिलाओं को कथित तौर पर शारीरिक शोषण जैसी अनचाही घटनाओं का भी सामना करना पड़ा

 मिस्र और ट्यूनीशिया में हाल के विद्रोह के दौरान सरकार के विरोध में सड़कों पर उतरीं महिलाओं को देश-दुनिया ने देखा और अधिकारों की लड़ाई में उनकी भूमिका सराही भी, लेकिन तस्वीर का एक पहलू यह भी है कि विश्व भर में अपने अधिकार के लिए संघर्ष के दौरान महिलाओं को कथित तौर पर शारीरिक शोषण और बलप्रयोग जैसी अनचाही घटनाओं का भी सामना करना पड़ा है।
रोजमर्रा के जीवन में ऐसे मामलों से दो-चार होने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि जागरुक हो रही महिलाओं को कुचलने का सबसे आसान तरीका उनके शारीरिक शोषण को ही समझा जाता है और ऐसे में उन्हें स्वयं ही अपनी रक्षा के लिए चौकस रहना चाहिए।
मिस्र में प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की स्थिति की ओर सबकी नजर उस समय पड़ी, जब सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्टर लारा लोगान के कथित तौर पर यौन शोषण की खबरें सुर्खियों में आयीं। लारा काहिरा में प्रदर्शन कवर करने गईं थीं, तभी अचानक वह अपने दल से अलग हो गईं। इसी दौरान उनके साथ कथित तौर पर शारीरिक शोषण की घटना हुई। लारा को इसके बाद महिलाओं के एक दल ने बचाया। महिलाओं के अधिकारों के लिए लंदन में काम कर चुकीं तिलोत्तमा निखिल दातार इसे महिला दिवस से जोड़कर कुछ ऐसे व्यक्त करती हैं,  ‘जब एक महिला पत्रकार के साथ ऐसा किया जा सकता है, तो ऐसी अफरातफरी में एक आम महिला की हालत क्या हो जाती होगी, इसके बारे में कोई भी सोच सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक दिन महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है, लेकिन दुनिया भर में अपने अधिकार की मांग कर रही महिला किन परिस्थितियों से गुजर रही है, वह सरकारों और दुनिया को चलाने वाली शक्तियों को नहीं दिखायी देता।’
तिलोत्तमा अपनी बात के समर्थन में श्रीलंका में लिट्टे के खिलाफ हुए संघर्ष में महिलाओं की खराब हालत और अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ जंग के बीच आये दिन सुर्खियों में आतीं महिलाओं की स्थिति का हवाला देती हैं। तिलोत्तमा कहती हैं,  ‘महिलाएं अपने अधिकारों के लिए जागरूक हो रही हैं, यह बहुत सकारात्मक पहलू है, लेकिन गृहयुद्ध, आतंकवाद और ऐसे ही दूसरे विपरीत हालात का सामना कर रही महिलाओं को भी इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि वे हमेशा अपने लोगों के साथ रहें और स्वरक्षा के कुछ उपाय हमेशा अपने दिमाग में रखें क्योंकि सरकार से सुरक्षा की अपेक्षा बेकार है।’
09…11 के हमलों के बाद अमेरिका की स्थितियों की प्रत्यक्षदर्शी रहीं डॉ. गुरदीप चड्ढा ने ‘भाषा’ से कहा कि ऐसी विपरीत परिस्थितियों में महिलाओं को निशाना बनाना हालांकि आसान  है, पर सामाजिक कार्यकर्ताओं और समाज के सदस्यों की सक्रियता महिलाओं को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी कदम होती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की दिशा में काम करने वाले संगठन ‘ह्यूमन राइटॅस वॉच’ ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया था कि मिस्र में महिला प्रदर्शनकारियों को शारीरिक शोषण का सामना भी करना पड़ रहा है। एक प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेकर सुरक्षा बलों ने उसकी मां का भी शोषण किया, जिसके बाद महिलाएं सुरक्षा बलों के विरोध में खुल कर सामने आने ल

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