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The Union Minister for Steel, Chemicals and Fertilisers, Mr Ram Vilas Paswan, enjoys Himachali food

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Wednesday, March 2, 2011

बिना रोज़गार के न तो सामाजिक सुरक्षा संभव है और न ही विकास


प्रदेश सरकार का मानना है कि बिना रोज़गार के न तो सामाजिक सुरक्षा संभव है और न ही विकास, इसलिए राज्य सरकार प्रदेश के युवाओं को रोज़गार एवं स्वरोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध करवाने के प्रति कटिबद्ध है। शिक्षा प्रणाली को रोज़गारोन्मुखी बनाया जा रहा है, ताकि युवाओं को अधिक से अधिक रोज़गार उपलब्ध हो सकें और वैश्विक मानकों पर खरा उतरने के लिए दक्षता उन्नयन के लिए विशेष अभियान चलाया गया है।

गत तीन वर्षों में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न दक्षता विकास कार्यक्रमों पर 60 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई है। इस अवधि के दौरान अकेले सरकारी क्षेत्र में ही 33,640 रोजगार के अवसर सृजित किए गए हैं, जबकि निजी क्षेत्र में 1,32,066 युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाया गया है। सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य तथा लोक निर्माण विभाग में 13,205 दिहाड़ीदारों की सेवाएं नियमित की गयी हैं। राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवाओं में शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को 3 प्रतिशत पद आरक्षित करने का निर्णय लिया है। इसके अतिरिक्त स्वतन्त्रता सेनानियों के बच्चों को सरकारी सेवा में 2 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है तथा उनके लिए एमबीबीएस, बीडीएस एवं बीएएमएस पाठ्यक्रमों मंे सीटें आरक्षित की गयी हैं।

प्रदेश सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के अध्यापकों के 19 हजार से अधिक पर सृजित किए हैं, जिनमें से 10 हजार पदों को भरा जा चुका है। गत दो वर्षों में 400 से अधिक ऐलोपैथिक चिकित्सकों एवं अनेक विशेषज्ञों की नियुक्ति कर, उन्हें प्रदेश के दूर-दराज क्षेत्रों में तैनात किया गया है। आयुर्वेदिक चिकित्सकों के 200 पद भरने की प्रक्रिया जारी है।

राज्य सरकार की जलविद्युत परियोजना प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने की योजना है, ताकि राज्य के युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके, जिससे वे सहकारी सभाएं बनाकर लघु जलविद्युत परियोजनाओं का निष्पादन कर सकें। राज्य सरकार ने 5 मैगावाॅट क्षमता तक की परियोजनाओं में हिमाचल प्रदेश के युवाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। हिमाचल प्रदेश औद्योगिकरण की दिशा में निरंतर अग्रसर है, इसलिए राज्य सरकार ने प्रदेश में स्थापित हो रही विभिन्न औद्योगिक इकाईयों मंे कम से कम 70 प्रतिशत रोजगार हिमाचली युवाओं को प्रदान करने की शर्त को कड़ाई से लागू करने का निर्णय लिया है। सोलन जिला में 50 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होने वाली पतंजलि योगपीठ में लगभग 1000 स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी में ग्रामीण आर्थिकी के पूर्ण रूपांतरण की क्षमता है। प्रदेश के विभिन्न स्थानों में पायलट आधार पर अनेक परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं। पंचायत स्तर पर स्थानीय युवाओं को लोकमित्र केन्द्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे स्वरोजगार के अवसर सृजित होंगे। इसी प्रकार सोलन जिला के वाकनाघाट में 400 करोड़ रुपये की लागत से सूचना प्रौद्योगिकी पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिसमें लगभग 25 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा। सोलन जिला के नालागढ़ के आडुवाल में 200 करोड़ रुपये की लागत से एक जैव प्रौद्योगिकी पार्क स्थापित किया जा रहा है, जिसमें  लगभग 500 लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।

प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत जनसंख्या गांवों में रहती है, इसलिए राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म, छोटे एवं मध्यम उद्यमों पर ध्यान केन्द्रित कर रही है, ताकि इन क्षेत्रों मेें रोजगार उपलब्ध हो सके। यह स्वरोजगार सृजित करने वाले उद्यम स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाने के साथ-साथ ग्रामीण आर्थिकी को भी सुदृढ़ कर रही है। हिमाचल ग्रामीण सड़क परियोजना के अंतर्गत ग्रामीण युवाओं को ऐसे क्षेत्रों में वाहन चलाने के परमिट दिए जा रहे हैं, जहां राज्य पथ परिवहन निगम की बसें चलाना संभव नहीं है। प्रदेश सरकार मनरेगा का कारगर कार्यान्वयन सुनिश्चित बना रही है तथा इसकी राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हुई है। इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक जाॅब कार्डधारक को वर्ष में 100 दिन का रोजगार सुनिश्चित हुआ है। अभी तक इस योजना के 9.4 लाख परिवारों को लाभान्वित किया गया है।

निचले स्तर पर विभिन्न नीतियों एवं कार्यक्रमों के कारगर कार्यान्वयन को सुनिश्चित बनाने के लिए 1081 ग्राम रोजगार सेवक, 92 कम्प्यूटर आॅपरेटर, 847 तकनीकी सहायक तथा 42 कनिष्ठ अभियंता नियुक्त किए गए है, जबकि कनिष्ठ अभियंताओं के 40 पद, कनिष्ठ लेखाकारों के 35 पद तथा कम्प्यूटर आॅपरेटरों के 12 पद सृजित किए गए हैं तथा इन्हें भरने की प्रक्रिया जारी है। प्रदेश के लिए तीन भारत रिजर्व बटालियनें स्वीकृत की गयी हैं, जिनमेें लगभग 3 हजार लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा। इसी प्रकार ऊना में आईटीबीपी बटालियन स्थापित की जाएगी तथा प्रदेश के लिए एक बीएसएफ बटालियन तथा एक आपदा प्रबन्धन बटालियन भी स्वीकृत की गयी है।

हिमाचल प्रदेश सरकार के सतत् प्रयास उसके स्वरोजगार, स्वाबलम्बन एवं स्वाभिमान के सपने को साकार करने की दिशा में कारगर सिद्ध होंगे।


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