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The Union Minister for Steel, Chemicals and Fertilisers, Mr Ram Vilas Paswan, enjoys Himachali food

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Tuesday, March 15, 2011

दलाई लामा ने निर्वासित संसद को लिखे पत्र में अपना फैसला बदलने से इनकार कर दिया

धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश)।। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने निर्वासित संसद को लिखे पत्र में अपना फैसला बदलने से इनकार कर दिया है। धर्मशाला में शुरू हुए संसद के बजट सत्र में स्पीकर पेंपा त्सेरिंग ने तिब्बती भाषा में लिखा दलाई लामा का पत्र पढ़ा। इसमें उन्होंने औपचारिक रूप से संसद से सार्वजनिक जीवन से संन्यास लेने के फैसले पर मुहर लगाने की गुजारिश की है।

उन्होंने कहा है कि इस प्रक्रिया में देर होने पर अनिश्चितता पैदा होगी और हमारे (तिब्बतियों) सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी। आध्यात्मिक गुरु के अपने फैसले पर अडिग रहने से तिब्बती संसद के सामने कठिन परिस्थितियां पैदा हो गई हैं।
उन्होंने अपने पत्र में कहा, ‘एक वक्त ऐसा आएगा, जब मैं नेतृत्व प्रदान करने के लिए उपलब्ध नहीं रहूंगा। ऐसे में यह जरूरी है कि आप मेरे स्वस्थ और समर्थ रहते एक मजबूत शासन तंत्र का विकास करें, जिससे निर्वासित तिब्बती सरकार आत्मनिर्भर बन सके। अगर हम अब से ऐसा शासन तंत्र लागू कर सकने में समर्थ हो सके तो जरूरत पड़ने पर मैं समस्याओं के समाधान में सरकार की मदद के लिए उपलब्ध रहूंगा। लेकिन ऐसा कर पाने में नाकामयाब रहने पर मेरी गैरमौजूदगी में अनिश्चितता और बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी। यह सभी तिब्बतियों का कर्त्तव्य है, वे ऐसी किसी स्थिति को पैदा होने से रोकें।’
दलाई लामा ने कहा, ‘यह बेहद जरूरी है कि हम निर्वासित तिब्बती प्रशासन का संचालन सुनिश्चित करें। तिब्बत मुद्दे पर हमारा संघर्ष जारी रहना चाहिए। मैं अपने अधिकारों का हस्तांतरण लंबे समय में तिब्बती लोगों के हितों के मद्देनजर कर  रहा हूं।

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